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Thursday, August 23, 2018

भरतपुर पुलिस हवालात में मौत


भरतपुर जिला में एक व्यक्ति की पुलिस हवालात में मौत हो गयी। मरने वाला व्यक्ति फौज से रिटायर था और उसको 60 पुलिस एक्ट जैसे साधारण मुकदमे में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले की न्यायिक जांच आरंभ हो गयी है।
भरतपुर जिला में पुलिस हवालात में घटना हुई है, उससे कई पुरानी घटनाओं की ओर भी ध्यान जाता है। रेंज आईजीपी मालिनी अग्रवाल लखनऊ की रहने वाली हैं। वे राजस्थान कैडर की 1996 बैच की आईपीएस हैं। वे 2001 में जालौर एसपी थीं। उनकी एसपी के रूप में किसी जिले में पहली पोस्टिंग थी। इसके बाद वे जयपुर ट्रैफिक तथा जयपुर में ही स्पैशल क्राइम की एसपी रहीं। उनको 2008 में वसुंधरा राजे सरकार ने ही जोधपुर सिटी एसपी के रूप में पोस्टिंग दी थी।
जोधपुर एसपी रहते हुए जोधपुर के मेहरानगढ़ किला में बने मंदिर में भगदड़ मच गयी थी और कई लोग हादसे का शिकार हो गये थे। इस घटना की सीधी जिम्मेदारी एसपी पर डाली गयी और उन्हें एपीओ कर दिया गया। इसके बाद वे किसी भी जिले में एसपी के पद पर नहीं रहीं। विभिन्न पदों पर रहते हुए वे आईजी बन गयीं और सरकार ने 2015 में उनको अजमेर रेंज आईजी का पद दिया गया। अजमेर रेंज के नागौर जिले में एक हवालात में बंद व्यक्ति की मौत हो गयी थी। उस समय आईजी पर तो कोई आंच नहीं आयी किंतु अब उनको भरतपुर रेंज में पोस्टिंग दी ही गयी है तो वहां भी 22-23 अगस्त की रात्रि को भी एक हवालाती ने फांसी लगा ली।
मालिनी अग्रवाल राजस्थान कैडर की पहली आईपीएस हैं जिनके कार्यकाल में इतनी अप्रिय घटनाएं हुई हैं। यह ऐसा संयोग है जिसकी कल्पना कोई भी पुलिस अधिकारी सपने में भी नहीं करता। संभव है मालिनी अग्रवाल ने भी कभी ऐसी दुर्भाग्यशाली घटना के बारे में सोचा भी नहीं होगा। पुलिस हवालात में मौत पूरे देश को हिला देती है और भरतपुर में हुई दर्दभरी घटना से भी ऐसा ही हुआ है।

Saturday, August 18, 2018

कयाल टीम से आज रूबरू होंगे दिनेश

हनुमानगढ़, 19 अगस्त। पुलिस महानिरीक्षक रविवार को हनुमानगढ़ में होंगे। वे पुलिस अधिकारियों के साथ लम्बी चर्चा करेंगे। हालांकि हनुमानगढ़ जिले में श्रीगंगानगर जैसे हालात नहीं है, लेकिन वे जिले के अधिकारियों के साथ लम्बी मंत्रणा अवश्य करना चाहेंगे।
बीकानेर रेंज आईजी के पद पर नियुक्ति के बाद दिनेश एमएन रविवार को पहली बार हनुमानगढ़ में होंगे। हालांकि उनको शनिवार रात को ही हनुमानगढ़ में होना चाहिये था लेकिन श्रीगंगानगर में मैराथन बैठक के बाद वे रात को रवाना नहीं हो पाये और रात्रि विश्राम उन्होंने श्रीगंगानगर में ही करने का विचार किया। रविवार को हनुमानगढ़ पुलिस अधीक्षक अनिल कयाल की टीम के साथ जिले की कानून व्यवस्था को और बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे।
एसपी का कार्यभार संभालने के बाद अनिल कयाल ने जिले की कानून व्यवस्था को वापिस पटरी पर ला दिया है। उन्होंने आदेश जारी कर रात 8 बजे के बाद शराब ठेके, मयखाने बंद करवा दिये थे। किसी भी थानाधिकारी की हिम्मत उनके आदेशों को टालने की नहीं है। जुआ-सट्टा बंद है। पुलिस परिवादियों की पुकार को फिर से सुनने लगी है और यह हनुमानगढ़ जिले के लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है। वहीं कोई भी व्यक्ति एसपी को उनके व्हाट्सएप पर सूचना भेजता है तो वे तुरंत उस पर कार्यवाही को अंजाम देते हैं। 

आईजी एमएन ने पंजाब के अधिकारियों को भी बुलाया क्राइम मीटिंग में

एसपी ने आरक्षीगण के लिए लगायी पेटी
थाना व अधिकारी से संबंधित शिकायत बिना नाम लिखे डाल सकेंगे
श्रीगंगानगर। बीकानेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने जिले के पुलिस अधिकारियों के साथ लम्बी बैठक की। इसको मंथन बैठक का नाम दिया जा सकता है और इस बैठक के जरिये आईजी ने पुलिस अधिकारियों को जिले की पुलिस की इज्जत बहाली के लिए मूल मंत्र भी दिया। वह मंत्र था, अपराधियों को सलाखों के पीछे डालो। इस बैठक में ही आईजी ने पंजाब के पुलिस अधिकारियों को भी बुला लिया था। उनके साथ भी बेहतर तालमेल के लिए विचार-विमर्श किया गया।
अबोहर मार्ग पर स्थित पुलिस लाइन में आयोजित क्राइम बैठक में आईजी दिनेश एमएन ने पुलिस अधिकारियों को साफ शब्दों में बताया कि संगठित अपराध जिले में पैर पसार रहा है। पंजाब-हरियाणा के संगठित अपराधी श्रीगंगानगर की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही और ज्यादा हो जाती है। पंजाब के अधिकारी भी इस बैठक में शामिल हुए। पंजाब पुलिस ने श्रीगंगानगर पुलिस के साथ मिलकर अपराध की रोकथाम करने की मंशा जतायी। आईजी और पुलिस अधीक्षक योगेश यादव ने अपराधियों के बारे में सूचनाओं के आदान-प्रदान करने की जरूरत पर बल दिया। पंजाब के अधिकारियों को विश्वास दिलाया गया कि श्रीगंगानगर जिला पुलिस पंजाब पुलिस के साथ मिलकर काम करेगी और संगठित अपराधियों को श्रीगंगानगर में कहीं भी पनाह नहीं लेने दी जायेगी।
बैठक प्रात: 11 बजे आरंभ हुई और शाम करीबन 7 बजे तक चली। 8 घंटे की इस मैराथन के बाद जिले के उन अधिकारियों के चेहरे मुरझाये हुए थे, जो अभी तक आरामपसंद जिंदगी जीते रहे हैं। उन्हें लगने लगा है कि अब एसी वाले ऑफिस से बाहर निकलकर काम करना होगा। इससे पहले प्रात: आईजी ने जिले के आरक्षीगण की सम्पर्क सभा ली। इस बैठक में सभी कर्मचारियों को आश्वस्त किया गया कि उनके लिए अच्छा माहौल बनाया जायेगा। पुलिस लाइन में एक पेटी भी लगायी गयी है, इसमें आरक्षीगण अपने अधिकारियों के दुव्र्यवहार व लापरवाही से संबंधित शिकायत डाल सकेंगे। इसमें अगर किसी आरक्षी का नाम नहीं होगा तब भी जांच करवायी जायेगी। इस पेटी की चाबी जिला पुलिस अधीक्षक के पास होगी। एसपी स्वयं हर सप्ताह इस पेटी को खोलकर उसमें डाली गयी शिकायतों का अध्ययन करेंगें और आवश्यकतानुसार आगामी कार्यवाही करेंगे। 

Monday, August 13, 2018

एसपी कयाल की टीम ने गोलूवाला में छापामार पकड़ा एक लाख का जुआ

एसी जुआघर में पहली बार कार्यवाही
श्रीगंगानगर। पुलिस अधीक्षक की स्पेशल टीम ने थाना पुलिस की मिलीभगत से चल रहे जुआघर का पर्दाफाश किया है। लाखों रुपये की हार-जीत प्रतिदिन हुआ करती थी। इस कार्यवाही के बाद गोलूवाला थाना पुलिस के खिलाफ एसपी कार्यवाही कर सकते हैं।
जानकार सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हनुमानगढ़ एसपी अनिल कयाल को एक सूचना गांव के ही लोगों ने दी थी कि गोलूवाला में एक दुकान के ऊपर बने शानदार कमरे में लाखों रुपये की हार-जीत पुलिस की मदद से की जाती है। एसपी ने इस सूचना मिलने के बाद स्पैशल टीम के इंचार्ज अरविंद बैरड़ को कार्यवाही करने के लिए आदेशित किया।
बैरड़ की टीम ने मुखबिर की बतायी गयी जगह पर छापा मारा तो 11 जने जुआ खेलते हुए पकड़े गये। इनके कब्जे से लगभग एक लाख रुपये की राशि मिली है। इस जुआघर को वातानुकूलित बनाया गया था और आसपास के इलाकों से भी लोग यहां जुआ खेलने के लिए आया करते थे। इस कार्यवाही की खबर जैसे ही गोलूवाला थाना पुलिस पहुंची तो वहां हड़कम्प मच गया। इस मामले में सभी लोगों के खिलाफ मुकदमा बैरड़ की तरफ से करवाया गया है। वहीं यह माना जा रहा है कि इस कार्यवाही के बाद गोलूवाला थाना पुलिस के अनेक कर्मचारियों पर गाज गिरना तय हो गया है। उल्लेखनीय है कि पुलिस अधीक्षक ने पूर्व में ही चेतावनी दी थी कि जो लोग जरायमपेशा लोगों को संरक्षण देंगे उनके खिलाफ निश्चित रूप से कार्यवाही होगी। 

आईजी दिनेश 17 को आयेंगे गंगानगर

सांध्यदीप के माध्यम से जिलावासियों को विश्वास दिलाया, अपराधियों के नाम का भय अब नहीं रहेगा

घड़साना से श्रीगंगानगर तक 4 घंटे बंद रहेगा बीकानेर मार्ग


एसपी ने जारी किये आदेश, इमरजेंसी वाहन ही चल सकेंगे
श्रीगंगानगर। मंगलवार 14 अगस्त को श्रीगंगानगर से लेकर घड़साना तक बीकानेर स्टेट हाइवे को कल प्रात: से लेकर 4 घंटे तक बंद रखा जायेगा। इस संबंध में एसपी ने आदेश जारी किये हैं।
एसपी योगेश यादव ने इस संबंध में बताया कि 14 अगस्त मंगलवार को भारत-पाक सीमा पर मानव शृंखला का कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। इस कार्यक्रम के दृष्टिगत प्रात: 10 से दोपहर 2 बजे तक श्रीगंगानगर से लेकर रोजड़ी तक भारी व हल्के वाहनों के लिए मार्ग बंद रहेगा। इस मार्ग पर इस अवधि के भीतर सिर्फ इमरजेंसी वाहन ही चल सकेंगे। उल्लेखनीय है कि श्रीगंगानगर से लेकर पदमपुर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, घड़साना-रोजड़ी तक रोजाना दर्जनों बसें चलती हैं और हजारों लोग आवागमन करते हैं। ये वाहन नहीं चलेंगे तो उपखण्ड मुख्यालय में एक-दूसरे को आने-जाने में परेशानी होगी। 

Friday, August 10, 2018

सीएम ने भेजा था एसपी बनाकर, महावर जी खुद को समझ बैठे थे निजाम


नागौर में परेशानी में, गंगानगर में नहीं सुनते थे फरियादियों को भी
भोले-भाले एसपी को देखकर कुख्यात पुलिस अधिकारी ने लपेट लिया था अपनी बातों में
सरकार का इनाम दिलाकर लिया था झांसें में
श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर जिले में पुलिस में तैनात ज्यादातर अधिकारी और कर्मचारी शेखावाटी क्षेत्र के होते हैं। यह लोग जिले को ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से पुकारते हैं। इसका अर्थ यह होता है कि यहां आकर लूटो और मौज करो। यही कारण रहा है कि श्रीगंगानगर जिले में पिछले दो दशक से वही अधिकारी घूम-फिरकर वापिस आ जाते हैं जो तब्दील होते हैं। पहले एसएचओ बनकर, फिर डीवाईएसपी और फिर एडीशनल एसपी बनकर। यही घूमते रहते हैं। दो दशक से जो अधिकारी यहां लगातार हैं वे अपने उच्चाधिकारियों को अपनी बातों में भी लेना जानते हैं और हरेन्द्र महावर भी उनके शिकार हो गये। वे पहले और आखिरी शिकार नहीं थे। उन अधिकारियों ने अपने झांसें में लिया और फिर उनका ब्रेनवाश कर उनको समझा दिया कि वे एसपी नहीं बल्कि निजाम हैं। भोले-भाले महावर जी भी खुद को यही समझ बैठे। अब वे नागौर जैसे जिले में है, जो जातिगत राजनीति का एक बड़ा केन्द्र है।
महावर ने जब जोधपुर से यहां कार्यभार संभाला था तो वे एक अच्छे अधिकारी की छवि लेकर आये थे और जब गये थे तो उनकी छवि पुलिस विभाग में लापरवाह अधिकारियों में शामिल हो गयी थी। यही कारण रहा कि उनको चुनावों के समय नागौर जिला दिया गया। वे गंगानगर के पहले एसपी हैं जो श्रीगंगानगर के बाद नागौर गये हैं। अच्छे अधिकारियों को सरकार अलवर, भीलवाड़ा, उदयपुर जैसे जिलों में भेजकर उनका सम्मान करती है। लापरवाह अधिकारियों को अपेक्षाकृत कम महत्व के जिलों में भेजा जाता है। यह जिले ऐसे होते हैं, जहां चैन की सांस कम आती है और टेंशन ज्यादा रहती है। नागौर जिला जाट राजनीति का एक प्रमुख केन्द्र रहा है और चुनावों के समय उस जिले का एसपी बनना काफी मुश्किल होता है। परेशानी बहुत होती है और इस परेशानी को फेस भी महावर कर रहे हैं।
तीन दिन पहले माननीय महावर साहब जोधपुर हाइकोर्ट में पेशी पर गये थे। वहां वे अनेक अधिकारियों से भी मिले। उनके चेहरे पर परेशानी साफ देखी जा रही थी। जिस भी अधिकारी ने उनको देखा, वो यह समझ चुका था कि नागौर में महावर साहब परेशान हैं। दुखी हैं। चुनावों तक उनका वहां रहना मुश्किल हो सकता है।
वसुंधरा राजे ने उनको मेहनती अधिकारी समझा था। इस कारण वे उनकी गुडबुक में भी थे। गंगानगर आकर वे लोकसेवक नहीं बल्कि स्वयं को निजाम समझ बैठे थे। उनको ऐसा एक अधिकारी ने ही समझाया था। यह अधिकारी उनका नजदीकी बन गया था और धीरे-धीरे यह हालात हो गये कि आदरनीय महावर साहब दफ्तर से ही गायब रहने लगे। वे लंच के बाद आते ही नहीं थे और रावला-घड़साना आदि दूर-दराज से आने वाले लोग उनका इंतजार करते रहते। हालात यह होती थी कि एडीशनल एसपी भी गायब और फरियाद सुनने की बारी आती थी सीओ एससी-एसटी की। दोनों उच्चाधिकारी गायब रहते थे तो सीओ  कार्यवाहक एसपी हो जाते थे। परिवाद कक्ष के प्रभारी उनको सीओ के पास लेकर जाते थे और ग्रामीणों को यह भी नहीं पता होता था कि जिस अधिकारी से मिलाया जा रहा है उससे उच्च रैंक का अधिकारी तो रायसिंहनगर में भी बैठता है। लोग परेशान। थानाधिकारी खुश। उनको कोई कुछ कहने वाला नहीं। उनकी दादागिरी शुरू। जिसको चाहा, उसको उठाया। जिसको चाहा उसको मुकदमे से बाहर कर दिया। खुलेआम यह खेल चल रहा था। अपराधिक तत्व पुलिस पर हावी हो गये थे और यह हवा जिले में बन गयी थी कि पुलिस को खरीदा जा सकता है और अनेक असामाजिक तत्वों ने ऐसा करके भी दिखाया।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जब गंगानगर आयी तो उनको यहां के हालात की जानकारी मिली। सांध्यदीप ने भी इस मामले में एक किरदार का रोल निभाया। अब नागौर में महावर साहब परेशान हैं। दुखी हैं। उनके दुख और परेशानी को दूर करने वाला वो अधिकारी नहीं है जो दिल्ली से उनको सम्मान दिलाकर लाया था। इस पुलिस अधिकारी का भाई अलवर में राज्य सरकार का राजस्व वसूलने वाला अधिकारी है। इस अधिकारी ने ही  अपने भाई के अधिकारी को सर्वश्रेष्ठ जिला एसपी का सम्मान दिला दिया। लोग त्राहि-त्राहि कर रहे थे। लोगों का जुल्म सह रहे थे और उसी जिले के एसपी को देश के सर्वश्रेष्ठ एसपी का सम्मान मिल रहा था। यह सम्मान पाकर भोले-भाले महावर के पांव जमीन पर नहीं लग रहे थे। वे इतने खुश थे कि पुलिस लाइन में जाकर बच्चों के साथ कांच की गोलियां खेलने लगे थे। कांच की गोलियां खेलते हुए वे अपने फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल करते थे। मीडिया में पब्लिश करवाते थे। वही महावर अब परेशान हैं। जो यहां निजाम बनकर काम कर रहे थे उनको समझ नहीं आ रहा कि उनकी परेशानी कैसे दूर होगी। उनको अब ध्यान में आ गया है कि वे तो लोकसेवक हैं। एसपी हैं। जिनकी जिम्मेदारी होती है जिले में कानून व्यवस्था बनाने की। अगर वे समय रहते कुछ सच्चाई को देख पाते तो आज इतना परेशान नहीं होते।

Wednesday, August 8, 2018

कांता सिंह जैसलमेर में भी फॉर्म में, शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान

जैसलमेर, 8 अगस्त। शराब पीकर  वाहन चलाने वालों के खिलाफ  सदर पुलिस की बड़ी कार्रवाई आज पुलिस अधीक्षक जगदीश चंद्र शर्मा द्वारा क्राइम मीटिंग में दिए गए निर्देशों की पालना में सदर थाना के थानाधिकारी कांता सिंह ढिल्लो, हवलदार छैला राम, गोम सिंह,  जसवंत सिंह, लेडी कॉन्स्टेबल शारदा देवी शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर चार व्यक्तियों को शराब पीकर वाहन चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया चारों व्यक्तियों के मोटरसाइकिल भी मौका पर सीज किए गए जो न्यायालय से जमानत पर छोड़ जाएंगे मोती राम सन ऑफ शंकर राम अभय सिंह बहादुर सिंह मूलचंद पुत्र हीरालाल राहुल सन ऑफ राधा कृष्ण चारों के मौसम RJ 15 ऐसे 7008 R15 एसबी 9863 RJ 15 ऐसे 4031 R15 यूएई 735

Tuesday, August 7, 2018

क्या ऐसे भलेमानस भी एसएचओ होते हैं?

एसपी हुए थानाधिकारी की सादगी को देखकर प्रभावित
श्रीगंगानगर। पुलिस विभाग में उच्चाधिकारी अनौपचारिक रूप से मानते रहे हैं कि पुलिस के नीचले अधीनस्थ अधिकारियों को नकेल कस कर रखने की आवश्यकता होती है अन्यथा वह बेलगाम हो जाते हैं। ऐसे प्रमाण हमें रोजाना देखने को भी मिल जाते हैं लेकिन तलवाड़ा थानाधिकारी की सादग को देखकर पुलिस अधीक्षक भी प्रभावित हुए।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हनुमानगढ़ जिला पुलिस अधीक्षक अनिल कयाल सोमवार को तलवाड़ा व टिब्बी पुलिस थानों का निरीक्षण करने के लिए गये थे। तलवाड़ा पुलिस थाना में वे कार्यभार संभालने के बाद पहली बार गये। थानाधिकारी रघुवीरसिंह की सादगी को देखकर एसपी काफी प्रभावित हुए। वहीं स्टाफ के साथ भी मिले और क्षेत्र के हालात की जानकारी ली।
सूत्रों ने बताया कि पुलिस अधीक्षक श्री कयाल ने थानाधिकारी को पाबंद किया कि जिस तरह की स्थिति उन्हें आज देखने को मिली है। वैसी ही रोजाना आम आदमी के लिए भी ऐसी ही होनी चाहिये। श्री कयाल ने थानाधिकारी की सादगी को देखकर उन्हें शाबाशी भी दी और कहा कि इसी तरह से क्षेत्रवासियों को न्याय दिलाने का प्रयास करते रहे। 

पुलिस और प्रशासन अब बिजी रहेगा!

10 अगस्त को चुनाव आयोग के साथ बैठक के बाद नहीं मिलेगा पानी पीने को भी समय

Friday, August 3, 2018

आजादी का जश्न जुआ-नशा से मुक्त करवाकर मनायेगी गंगानगर पुलिस

श्रीगंगानगर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन साल पहले लाल किला की प्राचीर से देश को स्वच्छता अभियान से देश को स्वच्छ बनाने के लिए प्रेरित किया था। इसके बाद समय-समय पर यह अभियान चलाया भी जाता है। वहीं इस बार श्रीगंगानगर की पुलिस जिले को संगठित अपराध मुक्त करना चाहती है। इसी कारण पूरे माह नशा-जुआ-सट्टा के खिलाफ अभियान चलाया जायेगा।
देश के लिए अगस्त माह पवित्र माना जाता है क्योंकि 15 अगस्त को देश लगभग 1 हजार सालों बाद गुलामी की जंजीरों से बाहर आया था किंतु इस दौरान तक देश के कई टुकड़े हो चुके थे, किंतु फिर भी हम इस बात के लिए संतुष्ट हैं कि हमें एकीकृत भारत मिला। गरीबी से लड़ता हुआ आजादी के बाद 70 साल पूर्ण कर चुका है। देश के सीमावर्ती जिले में अनेक प्रकार के सामाजिक अपराध भी काफी गहराई तक उतर चुके हैं। समाज ने कब इस बुराई को अपना लिया, उनको भी पता नहीं चला जिन लोगों ने इसको अपनाया।
समाज को जागरुक कर नशा, सट्टा-जुआ जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए पुलिस अधीक्षक योगेश यादव सक्रिय हुए हैं और उन्होंने पुलिस को आदेशित किया है कि अगस्त माह में अभियान चलाया जाये। एसपी श्री यादव ने बताया कि आज शुक्रवार को भी कार्यवाही की गयी हैं। पुरानी आबादी पुलिस ने सट्टा और सदर पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट याने नशे के खिलाफ कार्यवाही की है। 

Thursday, August 2, 2018

एसपी यादव ने दिया संदेश अब गंगानगर में चलेगा सिर्फ कानून का राज


 गिरफ्तार राकेश नारंग.photo provide by kotwali police

सट्टा किंग राकेश नारंग गिरफ्तार, रात पुलिस हवालात में निकलेगी सुबह अदालत में किया जायेगा पेश

श्रीगंगानगर। जिले की कमान अब मजबूत एसपी के हाथों में हैं। श्रीगंगानगर में अब सिर्फ कानून का राज ही चलेगा। आज इसका फिर से प्रमाण मिल गया है। जिले के सबसे बड़े सट्टाकिंग राकेश नारंग को पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। राकेश नारंग को कई सालों बाद गिरफ्तार किया गया है।
कोतवाल हनुमानाराम बिश्नोई से प्राप्त जानकारी के अनुसार 31 जुलाई को शिवम इन्कलेव में छापा मारा गया था। वहां पर दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किये गये राधेश्याम एवं चंदन प्रकाश ने पुलिस को बताया कि वह राकेश नारंग नामक के व्यक्ति के लिए सट्टाखाइवाली का काम करता है। राकेश नारंग पूरे जिले में सट्टे का कारोबार करता है और शहर के बीचों-बीच एच ब्लॉक में अपना हैडक्वार्टर बनाया हुआ है। मौके से लैपटॉप भी बरामद किया गया था।
इसके बाद आज मुकदमे में जांच के बाद राकेश नारंग पुत्र भजनलाल अरोड़ा निवासी अम्बिका सिटी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। थानाधिकारी के अनुसार राकेश नारंग सट्टा के लिए कुख्यात है और वह अपने गुर्गों के माध्यम से सट्टे का कारोबार करता है। अब इस मामले की उन लोगों की भी तलाश की जा रही है जो राकेश नारंग के माध्यम से जिले में सट्टे का संचालन कर शहर की सामाजिक एवं कानून व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कोतवाल ने गिरफ्तार किये गये राकेश नारंग की फोटो भी प्रेस नोट के साथ जारी की है।
यह जग जाहिर है कि पुलिस अधीक्षक योगेश यादव एक मजबूत और बड़े निर्णय लेने वाले अधिकारी हैं। श्रीगंगानगर से पहले जहां भी उनकी नियुक्ति रही है, वहां उन्होंने दिखाया है कि कानून का राज ही चलता है। गंगानगर में सौरभ श्रीवास्तव के बाद एक दशक से भी अधिक लम्बे समय बाद ऐसा ही मजबूत एसपी मिले हैं। उम्मीद है कि श्रीगंगानगर में अवैध कारोबार करने वालों को अब  जेल जाने से कोई नहीं बचा पायेगा। उल्लेखनीय है कि राकेश नारंग के खिलाफ पूर्व में भी 3 मुकदमे दर्ज हैं। 

Thursday, July 26, 2018

सख्त मिजाज एसपी यादव के पहले शिकार हुए एएसआई


गणेशगढ़ चौकी प्रभारी निलम्बित
सबसे पहले सांध्यदीप ने ही एएसआई के कारनामे किये थे उजागर
श्रीगंगानगर। पूरे प्रदेश में अपनी दबंगता के लिए अलग पहचान रखने वाले एसपी योगेश यादव ने कार्यभार संभालने के बाद अनुशासनहीनता के आरोप में गणेशगढ़ चौकी प्रभारी को निलम्बित कर दिया है। उसके खिलाफ विभागीय जांच भी बैठायी गयी है और संभवत: उसको आरोप-पत्र भी जांच के बाद दिया जा सकता है। 
परिवादी को न्याय मिले के सिद्धांत के साथ पुलिस अधीक्षक का कर्तव्य निभाने वाले एसपी योगेश यादव ने कार्यभार संभालने के साथ ही पुलिस अधिकारियों के साथ पहली बैठक में ही यह संदेश दे दिया था कि नशा के खिलाफ अभियान उनकी पहली प्राथमिकता है। इसको वे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। नशा अनेक अपराधों को जन्म देता है। एसपी के इन आदेशों के बावजूद लालगढ़ थाना क्षेत्र में नशे की खुली बिक्री हो रही थी। थानाधिकारी ने अपनी अधीनस्थ पुलिस पोस्ट गणेशगढ़ क्षेत्र में छापामारी की तो वहां नशीली दवाइयां मिलीं। इसको लेकर चौकी प्रभारी और थानाधिकारी के बीच विवाद हो गया। 
वहीं चौकी प्रभारी ने थानाधिकारी के खिलाफ बयानबाजी की तो इसको पुलिस अधीक्षक योगेश यादव ने गंभीरता से लिया है। श्री यादव ने 'सांध्यदीप.कॉ.इनÓ से वार्ता करते हुए बताया कि एएसआई धर्मेन्द्रसिंह को अनुशासनहीनता के आरोप में निलम्बित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि एएसआई के खिलाफ विभागीय जांच भी बैठायी गयी है, जो नशीली दवाओं में उनकी मिलीभगत की जांच करेगी। 
उल्लेखनीय है कि एएसआई और थानाधिकारी के बीच पिछले काफी दिनों से ही विवाद चल रहा था। दोनों ही पंजाबी जट्ट हैं। एक ही जाति के होने के बावजूद दोनों के बीच विवाद था। यह विवाद रसूख को लेकर था या... यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। धर्मेन्द्रसिंह उस समय भी विवादों में आ गये थे जब वे चौकी को ताला लगाकर अपने घर सूरतगढ़ चले जाते थे। इसको लेकर लाइव न्यूज भी सांध्यदीप.कॉ.इन द्वारा बनायी गयी थी, जो यू-ट्यूब पर देखी जा सकती है। 

Wednesday, July 25, 2018

गंगानगर विधानसभा पर ज्यादा नजर है सीएम की

प्रशिक्षु आईएएस और आईपीएस की नियुक्ति देती है कई इशारे
श्रीगंगानगर। राज्य सरकार ने विधानसभा चुनावों से करीबन चार माह पहले आईएएस और आईपीएस की तबादला सूची जारी कर श्रीगंगानगर विधानसभा क्षेत्र में प्रशिक्षु आईपीएस और आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति कर कई संकेत इशारों में दिये हैं और अब यह तय है कि अगले चुनावों में धन और बल दोनों ही नहीं चल पायेगा। अब जो जनता से ज्यादा सम्पर्क करेगा, उसी का भला होगा।
गत विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक होने के बावजूद आरोप लगा था कि धन और बल के आधार पर श्रीगंगानगर में चुनाव लड़ा गया। पैसों का खूब बंटवारा हुआ। इन चुनावों में तो कांगे्रेस को एतिहासिक हार का सामना करना पड़ा था और भाजपा भी पराजित हो गयी थी।
सीएम ने चुनावों से पहले श्रीगंगानगर उपखण्ड अधिकारी के पद पर प्रशिक्षु आईएएस सौरभ स्वामी की नियुक्ति की है। वहीं सीओ ग्रामीण के पद प्रशिक्षु आईपीएस मृदुल कच्छावा को लगाया है। हालांकि सीओ सिटी का पद भी रिक्त होने वाला है क्योंकि सीओ सिटी पर नियुक्त वर्तमान आरपीएस तुलसीदास पुरोहित आगामी दो माह के बाद सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इस कारण इस पद पर नये अधिकारी की नियुक्ति तय है।
जिला कलक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी पूरे जिले को संभालने की रहती है इस कारण वे एक विधानसभा सीट पर ज्यादा फोक्स नहीं कर पाते। वहीं उपखण्ड अधिकारी और सीओ को अपना ही क्षेत्र संभालना होता है। इस कारण धन-बल पर प्रभावी कार्यवाही करने के लिए सीएम ने बड़ा प्रयास किया है। इससे उन नेताओं को भी गहरा धक्का लगेगा जो पैसों के दम पर विधायक बनने का ख्वाब देख रहे थे।
आरएएस और आरपीएस राजनीतिक दबाव में आ जाते हैं लेकिन आईएएस और आईपीएस का सीधा लिंक सीएम से होता है इस कारण वे स्थानीय नेताओं के दबाव में नहीं आते। दो भारतीय सेवा के अधिकारियों की देखरेख में श्रीगंगानगर विधानसभा चुनाव होगा तो यह बड़ा ही रोचक होगा। क्योंकि शहर के कुछ इलाकों में पैसों का खेल पुराना चलता रहा है। इस बार यह खेल नहीं चलेगा और यही लोकतंत्र की जीत होगी, जिसमें आम आदमी भी विधायक बनने का ख्वाब देख सकता है।


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