शराबबंदी के आंदोलन से विधानसभा पहुंचने की गलतफहमी में पूजा छाबड़ा
श्रीगंगानगर। सूरतगढ़ के पूर्व विधायक गुरशरन छाबड़ा ने अपने राजनीतिक वजूद को बनाये रखने के लिए जयपुर में शराबबंदी आंदोलन की शुरुआत की थी। इस आंदोलन के दौरान ही उन्होंने अनशन करते हुए प्राण त्याग दिये। उनकी पुत्रवधू पूजा छाबड़ा ने अपने छुपे हुए एजेंडे के तहत जयपुर से इस अभियान की पुन: शुरुआत की किंतु उन्होंने पौल जल्दी ही खुल गयी।
एक साधारण विधायक परिवार की पुत्रवधू पूजा छाबड़ा विधायक बनने के ख्वाब के साथ श्रीगंगानगर आ गयी हैं। एक टू-स्टार ऑफिस खोला गया है। गन-मैन हैं। जहां भी जाती हैं कई गाडिय़ां साथ जाती हैं लेकिन आज तक पूजा छाबड़ा ने यह खुलासा नहीं किया है कि वे जयपुर-गंगानगर के बीच जो चक्कर काटती हैं, उसकी फंडिंग कौन कर रहा है। सूरतगढ़ में गुरशरन छाबड़ा को सभी जानते हैं। वे साधारण व्यक्ति थे। उनकी ईमानदारी को सभी जानते हैं।
राजनीति में स्वयं को चमकाने के लिए हर माह लाखों रुपये के खर्च की आवश्ययकता होती है और पूजा छाबड़ा इस आंदोलन के लिए धन कहां से जुटा रही हैं। आलीशान गाडिय़ां और गनमैन रखने जैसे महंगे शौक रखने के लिए उनको धन कौन मुहैया करवा रहा है, इसकी जानकारी उनका प्रवक्ता भी नहीं देना चाहता।
अब उनकी नजर अरोड़वंशी बाहुल्य सीट श्रीगंगानगर पर है। श्रीगंगानगर में उनको लग रहा है कि उनकी पार पड़ जायेगी, लेकिन अरोड़वंशी के नाम पर जयपुर से इम्पोर्ट कर नेता नहीं लाना चाहेगा और कोई पार्टी इम्पोर्ट किये गये नेता को टिकट देती है तो उसको यह नहीं भूलना चाहिये कि भैरोंसिंह शेखावत जैसे कद्दावर नेता को यहां के मतदाताओं ने नहीं छोड़ा था। पूजा छाबड़ा का गंगानगर की सामाजिक या राजनीति से वास्ता नहीं है और चुनाव से छ: माह पहले आकर कहना कि मैं भी आपकी ही जाति की हूं और मुझे ही वोट दीजिये तो यह भी संभव नहीं लगता। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के संभावित प्रत्याशी के रूप में पूजा छाबड़ा जो स्वयं को पेश कर रही हैं तो उनको यह नहीं भूलना चाहिये कि उस पार्टी में अरोड़वंशी नेताओं की कोई कमी नहीं है। वहीं जयदीप बिहाणी, राजकुमार गौड़, जगदीश जांदू, ललित बहल, अंकुर मिगलानी, जेएम कामरा जैसे बड़े नाम हैं और गंगानगर की जनता उनको जानती भी है। दलित बस्तियों में जाकर शराब बंदी के नाम पर भाषण तो दिया जा सकता है, वोट नहीं बटोरा जा सकता।
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