श्रीगंगानगर। मिलावटी पेट्रोल के बिकने का धंधा श्रीगंगानगर जिला में बड़े पैमाने पर चल रहा है। हालात यह हैं कि जिला मुख्यालय पर ही कुछ पेट्रोल पम्प के मालिक भी इस धंधे में शामिल हैं। इसका खामियाजा वाहन मालिकों को हो रहा है और उनको अपने वाहन को बार-बार ठीक करवाने के लिए मिस्त्री के पास ले जाना पड़ता है। इस धंधे की जानकारी रसद विभाग के बरसों से पदस्थापित प्रवर्तन अधिकारी राकेश सोनी को भी है लेकिन वे कहते हैं कि मैं कुछ नहीं कर सकता।
श्रीगंगानगर में मिलावटी पेट्रोल और डीजल की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। 'सांध्यदीपÓ के भी कार्यालय में आकर कुछ उपभोक्ताओं ने इस संबंध में शिकायत की। जब इस संबंध में संवाददाता ने इओ राकेश सोनी से बात की तो उनका कहना था कि वह पेट्रोल पम्पों का सुपरवाइजर अधिकारी नहीं है। कोई कुछ भी बेचे, वह कुछ नहीं कर सकता।
पेट्रोल पम्पों के निगरानी का अधिकार केन्द्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम में रसद विभाग को दिया है। पेट्रोल पम्प सरकारी कंपनियों के हैं। सरकार हमारे आयकर से वसूले गये पैसे और पेट्रोल पर लगने वाले विभिन्न तरह के टैक्स लगाकर उससे डॉलर खरीद करती है और उससे खाड़ी के देशों से पेट्रोल खरीदा जाता है।
धन सरकारी है। जनता ने सरकार को चुना है। जनता के दिये गये टैक्स से यहां बैठने वाले अधिकारियों को वेतन मिलता है। अगर कोई भी टैक्स देने से इन्कार कर दे तो सरकार दूसरे दिन ही दिवालिया हो जाये और सरकार के पास अधिकारियों-कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए पैसे नहीं होंगे।
इस सब हकीकत को अधिकारी भी जानते हैं और उनकी नैतिक व कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि वह पेट्रोल पम्पों पर जाकर जांच करे और जो भी दोषी पेट्रोल पम्प मालिक हो, उसके खिलाफ कार्यवाही की जाये, लेकिन अंगद के पांव की तरह बरसों से गंगानगर में ही बैठे राकेश सोनी इस तरह का नैतिक कार्य नहीं करना चाहते। उनकी अनैतिकता उनको रोक लेती है।
अगर कोई अधिकारी सक्षम होने के बावजूद अपने विभाग से संबंधित कोई कार्य नहीं करता है तो इसका अर्थ पब्लिक जानती है और उसको लिखने की आवश्यकता नहीं है। अनेक पेट्रोल पम्पों पर मिलावटी तेल बिकता है। इस बात की जानकारी वाहन मालिकों को भी हैं लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं होता। ऑपशन नहीं होने के कारण उन्हें यही मिलावटी तेल खरीदना पड़ता है और पेट्रोल-डीजल में की गयी मिलावट के कारण वाहन के इंजन जल्दी खराब हो जाते हैं और हजारों रुपये उनकी मरम्मत पर खर्च हो जाता है।
श्रीगंगानगर जिले में रसद अधिकारी का पद पिछले 8 माह से खाली है। डीएसओ की नियुक्ति को रूकवाया गया है और यह कार्य किसने किया है, इसको लिखने की आवश्यकता नहीं है। समझदार को इशारा ही काफी होता है। जिला कलक्टर ने रसद विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए अपनी ईमानदारी कार्य के लिए मिसाल पेश करने करने वाले एडीएम नख्तदान बारहठ को दिया हुआ है लेकिन उनके पास एडीएम प्रशासन का कार्य भी है और अनेक लोगों को यह भी पता नहीं है कि कार्यवाहक डीएसओ बारहठ हैं। वे राकेश सोनी के पास जाते हैं और अपनी शिकायत दर्ज करवाते हैं। राकेश सोनी उन शिकायतों का क्या करते हैं, यह भी बताने की जरूरत नहीं है।
यह सब कई माह से चल रहा है। अनेक वाहन चालकों का कहना है कि नयी गाडिय़ों से धुआं आने के कारण उनको काफी नुकसान हो रहा है और रसद अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिये। वहीं इस संबंध में ईओ राकेश सोनी से बात की गयी तो उन्होंने हाइकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पेट्रोल पम्पों पर कार्यवाही करने का अधिकार उनके पास नहीं है।
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