मिर्जेवाला फाटक पर लगने लगी है अब साहित्यकारों की महफिल
श्रीगंगानगर। इन दिनों श्रीगंगानगर जिले में एक सरकारी अधिकारी सक्रिय है। काल्पनिक दुनिया में जीने वाले इस अधिकारी को सत्यता से बहुत ही भय लगता है। मुंशी प्रेमचंद्र की कहानी के जरिये यह बता देते हैं कि यह किस स्तर के अधिकारी हैं।
कुछ माह पूर्व पंजाब के चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ए.के.47डी की चर्चा की थी। उनको नहीं पता था कि उनके ही राज में एक ऐसा भी सरकारी अधिकारी है जो ए.के.-90डी के नाम से फेमस है। जब समय संध्यावंदन का समय होता है तो उस समय ये अधिकारी मुंशी प्रेमचंद्र को श्रद्धांजली करने के लिए मिर्जेवाला फाटक पर पहुंच जाते हैं। वहां यह जनाब आने-जाने वाले लोगों को रोकते हैं और उन्हें मुंशी प्रेमचंद्र की कहानी 'कफनÓ सुना देते हैं। कहानियों की कमी नहीं है। जहां भी रहते हैं किताबों का स्टॉक ले जाते हैं। जिस अधिकारी की फिल्ड में पोस्टिंग हो वह दुनिया की हर रोज एक नयी कहानी स्वयं अपनी आंखों से देखता हो। छोटी-छोटी बालिकाओं को जिस्मफरोशी के धंधे में इसलिए डाल दिया जाता है क्योंकि उनके परिजनों के पास पेट भरने के लिए कोई और साधन नहीं है। एक वो भारत है जो आसमान में अपनी ताकत दुनिया को हजारों करोड़ रुपये फूंक देता है। और एक वो भारत भी है जहां इन बालिकाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सरकार के पास कोई ठोस उपाय नहीं है। इन बालिकाओं को वो करना पड़ता है जो उन्हें दिल से मंजूर नहीं होता। यह डरावना सच यह साहब रोज देखते हैं। इनका कार्य भी इस तरह की बालिकाओं को अभय प्रदान करना है किंतु साहब 'कफनÓ सुनाकर लोगों को यह दर्शाते हैं कि वे बहुत ही संवेदनशील इंसान हैं। कहानियां काल्पनिक होती हैं और फिल्ड पोस्टिंग में सामने आने वाली हकीकत सच्ची होती है। उसको देखने की आवश्यकता है। उसको सुधारने की आवश्यकता है लेकिन यह साहब बस 'कफनÓ के जरिये अपने को मजबूत अधिकारी बनाने के लिए जुटे हुए हैं।
Satish Beri
Sri Ganganagar
9772688172
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